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बाइबिल में शब्दों का अर्थ | जानिए बाइबिल में लिखे गए शब्दों का अर्थ

जानिए बाइबिल में लिखे गए शब्दों का अर्थ

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शब्दों का अर्थ 

इसमें बताये गए सभी अर्थ पवित्र बाइबिल पर आधारित है

आशीषें

आशीषें वे अच्छी बातें हैं जो परमेश्वर हमारी भलाई के लिए करते हैं। जब हम परमेश्वर से आशीषें मांगते हैं, तो हम उनसे मदद का अनुरोध करते हैं और चाहते हैं कि वह हमारे अंदर अच्छे काम करे।

आदर

किसी व्यक्ति का आदर (सम्मान) करने का अर्थ है उसके बारे में अच्छा बोलना। किसी के साथ अच्छा व्यवहार करना क्योंकि आप उनका सम्मान करते हैं और उन्हें महत्व देते हैं।


अनंत

जो सदैव हैं और सदैव अविनाशी हैं। जिनका कोई प्रारंभ अथवा कोई अंत नहीं होता।


अनुग्रह

अनुग्रह परमेश्वर का एक उपहार है, जो परमेश्वर हमें देता है क्योंकि वह हमारे प्रति बहुत दयालु है। यह ईश्वर (परमेश्वर) की ओर से क्षमा और सहायता है।


पाप/अपराध/पापी

अपराध या पाप वे गलत कार्य हैं जो लोग ईश्वर के विरुद्ध या मनुष्यों के विरुद्ध करते हैं। जब हम परमेश्वर के नियमों का पालन नहीं करते, तो हम पाप करते हैं। सभी मनुष्य अपराधी या पापी हैं क्योंकि वे ईश्वर या अन्य मनुष्यों के विरुद्ध कार्य करते हैं। सभी मनुष्य पापी हैं।


आत्मा

मनुष्य की आत्मा वह है जिसका कोई शरीर नहीं होता और जिसे हम देख नहीं सकते। ईश्वर एक ऐसी आत्मा है, उसने अन्य आत्माएँ बनाईं जो हमें दिखाई नहीं देतीं और आत्माएँ अच्छी या बुरी हो सकती हैं।


पवित्र आत्मा

परमेश्वर का आत्मा जिसे यीशु ने अपने लोगों की मदद के लिए भेजा। पवित्र आत्मा तो परमेश्वर का एक अन्य नाम है। इसे परमेश्वर का आत्मा, यीशु मसीह का आत्मा और हमारी मदद करने वाला आत्मा भी कहा जाता है। पवित्र आत्मा एक व्यक्ति है, किंतु हमारी तरह मनुष्य नहीं है। वह परमेश्वर है, पिता परमेश्वर और पुत्र परमेश्वर के बराबर है। वह संसार में मनुष्यों के बीच परमेश्वर का काम करता है। पवित्र आत्मा को कोई नहीं देखता किंतु जो लोग यीशु को जानते हैं, वह उनके साथ व उनके अन्दर रहता है।


विश्वास

विश्वास का अर्थ है किसी व्यक्ति या वस्तु पर विश्वास रखना। "परमेश्वर पर भरोसा करना" और विश्वास रखना। यह जानना कि परमेश्वर (ईश्वर) वास्तविक है, भले ही हम उसे देख नहीं सकते।


उद्धार

जब परमेश्वर हमें पाप के परिणामों और उसकी शक्ति से बचाता है, वह उद्धार होता है । व्यक्ति को उसके जीवन में बुरी बातों से और पाप" के परिणामों से बचाना।


उद्धारकर्ता

यीशु खीष्ट उद्धारकर्ता है। वह जो हमें वापस परमेश्वर की ओर लाता है और हमें हमारे बुरे कामों के फलस्वरूप मिलने वाले दंड से बचाता है।

या

यीशु मसीह उद्धारकर्ता है. जो हमें परमेश्वर के पास वापस लाता है और हमारे बुरे कर्मों के परिणाम से बचाता है।


उपासना

उपासना (आराधना) का अर्थ है परमेश्वर को यह दिखाना कि वह महान है और हम उससे बहुत प्यार करते हैं। उपासना करने का अर्थ है परमेश्वर को सम्मान और धन्यवाद देना। वह कार्य जो हमें परमेश्वर के साथ होने पर करना चाहिए।


कलीसिया

कलीसिया लोगों का एक समूह होता है, जो यीशु ख्रीष्ट में विश्वास करता और उनकी सभी बातों को मानता है। इस समूह के लोग सभाएं करते हैं। वे विश्वासियों को बपतिस्मा  देते हैं। वे प्रभु भोज खाते हैं । वे यीशु ख्रीष्ट की शिक्षाओं पर चलते हैं।


कुँवारी

जिसने शारीरिक संबंध न बनाया हो।


क्षमा

क्षमा करने का मतलब है, किसी व्यक्ति के विषय में बुरी बातों को याद न रखना और उसके प्रति प्रेम दिखाना। जब परमेश्वर हमें क्षमा करता है, तो वह उन बुरी बातों पर ध्यान नहीं देता जो हम उसके विरूद्ध करते हैं।


चेला

चेला वह व्यक्ति होता है, जो किसी दूसरे व्यक्ति के पीछे चलता और उससे सीखता है। वह व्यक्ति जो यीशु में विश्वास करता है। वह व्यक्ति जो यीशु की शिक्षाओं पर चलता है।


स्वर्गदूत

स्वर्गदूत परमेश्वर का सेवक होता है, जो उसके संदेश लाता हैं। स्वर्गदूत एक आत्मा" होता है। स्वर्गदूत परमेश्वर के बारे में अच्छी बातें कहता है। स्वर्गदूत वही करता हैं, जो परमेश्वर चाहता है। स्वर्गदूत उन लोगों की भलाई करता है, जो परमेश्वर के परिवार में होते हैं।


धर्मी

धर्मी होने का मतलब होता है, परमेश्वर के साथ सही रहना। धर्मी वे लोग होते हैं, जो परमेश्वर के साथ सही रहते हैं। जब परमेश्वर किसी व्यक्ति को अपने लिए सही बनाता हैं, तो वह उस व्यक्ति को शुद्ध समझता है। धर्मी व्यक्ति परमेश्वर का मित्र होता है, उसका शत्रु नहीं। धर्मी ठहराया जाना धर्मी ठहराए जाने का अर्थ है, कि परमेश्वर के कार्य के द्वारा उससे सही सम्बन्ध में रहना। परमेश्वर ऐसा तब करता है, जब हम उद्वार" के लिए उस पर भरोसा करते हैं।


नर्क

नर्क वह स्थान है, जहा मृत्यु के बाद नर्क दुष्ट लोगों के लिए सज़ा का स्थान है।


पवित्रीकरण

पवित्रीकरण का मतलब है वह परीवर्तन, जो हमारे अन्दर तब आता है, जब परमेश्वर हमें पवित्र बनाता है। परमेश्वर यह परिवर्तन तब शुरू करता है जब हम यीशु पर भरोसा करते हैं। पवित्र आत्मा" की सहायता से, परमेश्वर हमें परिवर्तित करता रहता है, जब तक हम यीशु के समान नहीं बन जाते।


पुनरूत्थान

पुनरूत्थान का मतलब है मुर्दों में से जी उठना। फिर जीवित हो जाना ।


प्रभु

बाइबिल में परमेश्वर का नाम प्रभु है। इसका मतलब यह है, कि वह सभी वस्तुओं के ऊपर है और सभी का शासक है। जब हम यीशु की आज्ञा का पालन करते हैं तो उनके लिए हम इसी नाम का प्रयोग करते हैं।


प्रायश्चित

प्रायश्चित करने का मतलब होता है, पाप से मन फिराना। परमेश्वर जो चाहता है, वह करना। यह फैसला करना कि हम वह नहीं करेगें जो हम पहले करते थे।


बपतिस्मा

बपतिस्मा में कलीसिया " का प्रमुख एक व्यक्ति को एक पल के लिए पानी में डुबकी देता है और फिर उसे पानी से निकाल लेता है। इस तरह से हम यह दिखाते हैं कि यीशु मसीह ने हमें शुद्ध कर दिया है। हम सब को यह भी दिखाते हैं, कि हम कलीसिया का हिस्सा हैं। जब हम बपतिस्मा लेते हैं, तो यह हमें यीशु की मृत्यु की याद दिलाता है। लोगों ने उन्हें एक कब्र में रख दिया। किंतु वह जी उठे। बपतिस्मा लेकर हम यह प्रगट करते है की अब हम यीशु मसीह के पीछे चलने के लिए तैयार है। अब हम यीशु के है। 


बुराई

हरेक गलत काम जो परमेश्वर के विरूद्ध होता है।


भरोसा

भरोसा करने का मतलब होता है, किसी ऐसी वस्तु या व्यक्ति का अनुकरण करना जिसे हम सच समझते हैं। विश्वास  रखना और विश्वास में काम करना।


भविष्यद्वक्ता

भविष्यद्वक्ता वह होता था, जो दूसरे लोगों को यह बता सकता था, कि परमेश्वर क्या चाहता है। बहुत समय पहले भविष्यद्वक्ता परमेश्वर की ओर से बोलते थे। वे भविष्य में होने वाली घटनाओं के बारे में बता देते थे।


मूर्ति

मूर्ति वह वस्तु है, जो लकड़ी, पत्थर या धातु की बनी होती है, जिससे लोग प्रार्थना करते हैं। उन्हें परमेश्वर की उपासना करनी चाहिए। मूर्ति किसी व्यक्ति या वस्तु की तस्वीर होती है, जिसे लोग परमेश्वर की जगह प्रेम करते है। मूर्ति झूठा देवता होता है, जिसे कोई व्यक्ति परमेश्वर से अधिक प्रेम करता है।


राज्य

राज्य वह होता है, जहां कोई राजा शासन करता है। वह देश होता है, जहां कोई राजा राज करता है। परमेश्वर का राज्य वह है, जहाँ परमेश्वर का शासन चलता है।


यहूदी

यहूदी वह व्यक्ति है, जो इब्राहीम, इसहाक, याकूब व उनकी संतान के वंश का है।


लेपालक

लेपालक कानूनी तौर पर परिवार में शामिल किया गया व्यक्ति होता है। जिसे हम आम भाषा में गोदनामा भी कहते है उस व्यक्ति को अब उस परिवार के बच्चे की तरह पाला जाता है। पहले हम परमेश्वर के लिए अजनबी थे और परमेश्वर के शत्रु थे। किंतु अब परमेश्वर ने हमें अपनी प्रिय संतान कहा है।


विश्राम दिन

जिसमें लोगों को काम नहीं करना चहिए। यहूदियों के लिए यह एक खास दिन होता है, जिसमें वही किया जाता है जिससे परमेश्वर प्रसन्न होता है।


विश्वासी

विश्वासी वह व्यक्ति है जो यीशु मसीह को जानता और स्वीकार करता है।


व्यभिचार

व्यभिचार का मतलब होता है, उस व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाना जो आपका पति या आपकी पत्नी नहीं है।


शैतान

शैतान दुष्ट के लिये एक अन्य नाम है। शैतान बुरे देवदूतों में सबसे अधिक बुरा है।


क्रूस (सलीब)

क्रूस या सलीब लकड़ी के दो टुकड़ों को जोड़ कर बनाया जाता है। यीशु के समय में लोग अपराधियों को मारने के लिए उन्हें क्रूस (सलीब) पर जड़ देते थे । यीशु की मृत्यु क्रूस (सलीब) पर ही हुई थी।


स्वर्ग

स्वर्ग वह स्थान है जहां परमेश्वर और यीशु मसीह हैं। स्वर्ग उन लोगों का भावी घर है, जो परमेश्वर को जानते- मानते हैं । यह वह स्थान है, जहां लोग हमेशा आनंदित रहेंगे और उन्हें कोई कष्ट नहीं होगा। परमेश्वर वहां वास और शासन करता है। स्वर्ग वह जगह है जहां परमेश्वर और यीशु को मानने वाले अपनी मृत्यु के बाद जाएंगे


स्वीकार

अपनी गलतियों, अपने अपराधों, अपने पापों को मान लेना। जो अपने किया हो उसे मन लेना की वह आप थे। 


त्रिएकता

त्रिएकता वह शब्द है, जो हम परमेश्वर के विषय में प्रयोग करते हैं, जो कि त्रिएक है : परमेश्वर पिता, परमेश्वर पुत्र ( यीशु ) और परमेश्वर पवित्र आत्मा"।


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